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Go Back   Snehasallapam - Malayalam Cinema Reviews, News and Updates > New Release Cinema Reviews

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Old 01-28-2018, 02:22 AM   #11 (permalink)
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Swara Bhaskar's, naked level of Open letter to SLB on Padmavat,..::

At The End of Your Magnum Opus... I Felt Reduced to a Vagina Only'


Some more basic points:
  • Women are not only walking talking vaginas.
  • Yes, women have vaginas, but they have more to them as well. So their whole life need not be focused on the vagina, and controlling it, protecting it, maintaining it's purity. (Maybe in the 13th century that was the case, but in the 21st century we do not need to subscribe to these limiting ideas. We certainly do not need to glorify them. )
  • It would be nice if the vaginas are respected; but in the unfortunate case that they are not, a woman can continue to live. She need not be punished with death, because another person disrespected her vagina without her consent.
  • There is life outside the vagina, and so there can be life after rape. (I know I repeat, but this point can never be stressed enough.)
  • In general there is more to life than the vagina.
You may be wondering why the hell I am going on and on thus about vaginas. Because Sir, that's what I felt like at the end of your magnum opus. I felt like a vagina. I felt reduced to a vaginaonly. I felt like all the minor' achievements that women and women's movements have made over the years like the right to vote, the right to own property, the right to education, equal pay for equal work, maternity leave, the Vishakha judgement, the right to adopt children... all of it was pointless; because we were back to basics.


More here : Swara Bhaskar's open letter to Bhansali on Padmaavat | 4951973 | Bollywood News, Bollywood Movies, Bollywood Chat Forum




------------------------------.

Last edited by P_Jani; 01-28-2018 at 07:44 AM.
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List of states releasing Padmaavat







A worth seeing interesting,...

Where the legend of Padmavati still lives







....

Last edited by P_Jani; 01-28-2018 at 08:40 AM.
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SLB's Padmavat -- What was the truth ??





हिन्दू अभिमान करे .... भंसाली को धन्यवाद दे .... उसने फ़िल्म में राजपूताने के गौरव और अभिमान को दर्शाया है ....
अच्छा ?? ....
कौनसा राजपुताना ?? कौनसा इतिहास ?? कौनसा वैभव ?? कौनसा गौरव ?? .... कौनसा अभिमान ?? .... कभी हिंदुस्तान के मानचित्र में आपने राजपूताने का नक्शा भी देखा है ?? .... बिना गूगल किये बता सकते हो कितनी देशी रियासतों के एकीकरण से राजपुताना बना है ?? .... पाकिस्तान में राजपूताने की कितनी रियासतें गयी है ?? .... मारवाड़ मेवाड़ मेवात सहित राजपूताने की सीमाएं कहाँ तक थी ?? ....
मैंने कल रात पद्मावत देखी 3 बजे .... दर्शक बन कर नहीं समीक्षक बन कर .... मेरे लिए ये आवश्यक था ....
पिछले 2 महीने से हमारे बीच एक महीन रेखा खींच गयी .... पद्मावत समर्थक पक्ष .... पद्मावत विरोधी पक्ष .... दो महीने से समर्थक पक्ष ने मां पद्मावती राजस्थान या राजपूत समाज पे निम्न से निम्न आरोप प्रत्यारोप कुंठा प्रदर्शित करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी ....
दो दिन से दूसरी थ्योरी आयी है .... मुसलमान पद्मावत को नापसंद कर रहे है .... खिलजी की वेशभूषा रहन सहन कबीलाई दिखाया गया है .... कामुक लौंडेबाज दिखाया गया है .... इस वजह से ....
हिंदुओं (कुछ हिंदुओं) ने उम्मीद से उल्टा काम किया है .... जिसमें खुद को राष्ट्रवादी हिन्दू कहने वाले भी शुमार है .... हालांकि ये भाजपावादी या मोदीवादी है राष्ट्रवाद से इनका कोई लेना देना नहीं .... ये हिन्दू पद्मावत लगने वाले थियेटर के बाहर खड़े हो के अपनी सेल्फी डाल रहे है .... टिकिट की सेल्फी डाल रहे है .... फ़िल्म की समीक्षात्मक पोस्ट कर रहे है .... राजपूताने के वैभव शौर्य को दिखाने के लिए भंसाली का शुक्रिया अदा कर रहे है .... वजह नंबर एक शायद इन लोगों को राजस्थान और राजपूताने के वैभव शौर्य पराक्रम से कुंठा है .... वजह नंबर दो ये इतिहास से अनभिज्ञ है .... गूगलिया इतिहासकार है .... इतिहास से इनका कोई लेना देना नहीं है .... बस स्वघोषित ज्ञानी बनना है ....
कलम चलाने मात्र से कोई लेखक या इतिहासकार नहीं बन जाता है .... जिसको हमारे राजपूताने की वास्तविक परम्पराओं का ही ज्ञान नहीं .... नियमों रीति रिवाजों का ज्ञान नहीं .... वो भी भंसाली को शुक्रिया अदा कर के राजपूताने के शौर्य को दिखाने का बोल रहे है ....
फ़िल्म में राजपुताना कहाँ है ?? राजपूताने का शौर्य वैभव कहाँ है ?? .... 80% फ़िल्म में खिलजी को दिखाया गया है .... फ़िल्म का नाम पद्मावत ना हो के खिलजावत होना चाहिए ....
मैं अक्सर राजपूताने के इतिहास पे लिखता रहता हूँ .... मैंने चितौड़ के पहले दूसरे तीसरे जौहर और शाका पर लिखा है मेरी टाइम लाइन पर आप पढ़ सकते है .... राजपूताने के अन्य जौहरों शाकाओं पर लिखा है .... आगे भी लिखता रहूंगा ....
भाईसाब आपको राजपूताने का र मालूम है ?? ....
जौहर और शाका मालूम है ?? .... दोनों का अंतर मालूम है ?? .... क्षत्रिय का क्ष मालूम है ?? ....
जौहर के साथ शाका भी होता था .................. जौहर का मतलब सत्तित्व की रक्षा के लिए क्षत्रिय सनातनी वीरांगनाएं खुद को सशरीर अग्नि को समर्पित कर देती थी ............... मां पद्मावती को कायर कहने वाले लड़कर मरने की सलाह देने वाले ध्यान दें .... इस्लाम मे लाश के साथ संभोग की प्रथा आज भी है ................ शाका जौहर के बाद की नंबर दो प्रथा है .... क्षत्राणी के पंचतत्व में विलीन होने के बाद क्षत्रिय योद्धा श्वेत वस्त्र धारण करते है .... सिर पे केसरिया बाना धारण करते है .... ततपश्चात क्षत्राणी की पार्थिव देह की राख से ललाट पर तिलक लगा के प्रण लेते है कि जब तक शरीर मे एक कतरा लहू बाकी है .... एक सांस बाकी है .... रणभूमि में लड़कर मरेंगे .... ज़िंदा लौट के दुर्ग/गढ़/घर नहीं आएंगे .... सर कट जाए बेशक धड़ लड़ते रहेंगे .... इसी दृढ़ संकल्प के साथ केसरिया बाना धारण करने को शाका कहा जाता है .... हर जौहर के साथ शाका होता है .... जौहर क्षत्रियत्व की रक्षा का प्रथम सौपान/प्रक्रिया है ततपश्चात नंबर दो पर शाका ....
आइये आज 1303AD में चलते है .... 2 माह पहले मैंने विस्तार से लिखा था आज संक्षेप में लिख रहा हूँ .... सर्वप्रथम प्रातःकालीन बेला में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां पद्मावती एवं 16000 क्षत्राणियों का जौहर हुआ .... फिर मुट्ठी भर क्षत्रियों का शाका हुआ .... रणभूमि में राजपूतों ने अदम्य साहस वीरता का परिचय दिया .... क्षत्रियों की पराजय के बाद खिलजी ने दुर्ग चीत्तोड़ में प्रवेश किया .... जहां उसके हाथ निराशा लगी .... राख का ढेर लगा .... खिलजी चीत्तोड़ की कमान अपने बेटे ख़िज़्र खाँ को सौंपकर दिल्ली लौट गया ....
भंसाली ने पद्मावत में क्या दिखाया है ..................
(1) शाका नहीं दिखाया .... जबकि शाका हमारी जौहर की तरह वीर और महान प्रथा है . हमारे वैभव गौरव शौर्य अभिमान का प्रतीक है .... भंसाली ने उल्टा दिखाया है .... पहले रणभूमि में महारावल रतन सिंह को धोखे से मारा जाता है फिर जौहर होता है ............... ये गलत है .... वास्तविकता ये है कि पहले जौहर के पश्चात फिर शाका एवं युद्ध हुआ .... फेसबुकिये समीक्षक इतिहासकार बताए क्या ये इतिहास से छेड़छाड़ नहीं है .... सनातन क्षत्रियत्व की शाका जैसी गौरवशाली प्रथा को ना दिखाना एवं पहले युद्ध फिर जौहर दिखाना ....
(2) भंसाली की पद्मावत में दिखाया गया है खिलजी अकेला दुर्ग चितौड़ में प्रवेश करता है .... दुर्ग चीत्तोड़ की प्राचीर पर पागलों की तरह दौड़ता रहता है .... 16000 वीरांगनाओं के बीच भी जाता है ............. खिलजी अकेला दुर्ग चितौड़ में प्रवेश ?? .... 16000 वीरांगनाओं के बीच अकेला खिलजी ?? .... कटार ना घौम्पी वीरांगनाओं ने खिलजी के हाहाहा ?? .... खिलजी की सेना गयी थी दुर्ग चीत्तोड़ में खिलजी के साथ तब राख का ढेर और निराशा हाथ लगी उनके क्योंकि जौहर सुबह ही हो चुका था .... जौहर बाद में होता खिलजी के दुर्ग में प्रवेश के बाद तो क्या खिलजी एवं उसकी सेना होने देती जौहर ?? .... हास्यास्पद नहीं है ये ?? ....
(3) महारावल रतन सिंह की प्रथम पत्नी सौतिया डाह से ग्रसित है .... ये कहाँ पढा भंसाली ने ?? ....
(4) महारावल रतनसिंह जब अंतिम युद्धरत रहते है उनका केसरिया बाना कहाँ है ?? .... बकौल भंसाली डेढ़ साल से वो कह रहे है कि उन्होंने इतिहास का अध्ययन किया है .... फ़िल्म निर्माण के लिए इतिहासकारों के पैनल का गठन किया है ................ भारतीय नहीं सम्पूर्ण वैश्विक इतिहास देखिये आप .... सबसे ज्यादा युद्ध हमारी भूमि (राजस्थान) में लड़े गए है .... सबसे ज्यादा युद्ध हमारे पुरखों ने लड़े है ................. शाका का मतलब ही होता है केसरिया बाना धारण करना श्वेत वस्त्र धारण करना .... ना शाका दिखाया ना श्वेत वस्त्र ना महारावल के माथे पे केसरिया बाना ............... 200 या 300 करोड़ लागत की फ़िल्म बनाकर इतनी बड़ी भूल ?? .... कौनसे इतिहासकारों का पैनल बनाया था ये दृश्य फिल्मांकित करने के लिए ?? ....
(5) घूमर नृत्य के बोल हमारे घूमर नृत्य के बोल नहीं है .... हमारा घूमर नृत्य यूट्यूब पे है आप देखिये सुनिए उसके बोल ............ बकौल फ़ेसबुकिया टुच्चे इतिहासकारों समीक्षकों के .... ये गौरी पूजा नृत्य था जो जायज था .... आज इक्कसवीं सदी में गौरी गणगौर जगदम्बा चामुंडा भवानी एकलिंग जी पूजा में भी जागीर की ठकुराइन भी नृत्य नहीं करती .... वर्जित है .... फिर 800 साल पहले के रूढ़िवादी समाज .... राजपुताना आन बान शान के परिवेश में साक्षात चीत्तोड़ की रानी का नृत्य कैसे और क्यों ?? ........... मैं शुरू से खंडन कर रहा हूँ ये गलत दृश्य या गाना है ....
(6) इतिहास की मां बहन 50 जगह की गई है फ़िल्म में ....
इसी भंसाली ने पेशवा बाजीराव जैसे महान वीर योद्धा को एक रोमियो या लवर बॉय दिखाया था ....
इस फ़िल्म में ऐतिहासिक पात्रों तथ्यों की छेड़छाड़ के लिए इतिहास भंसाली को माफ नहीं करेगा ....
फ़ेसबुकिया इतिहासकार समीक्षक पहले राजपूताने का र लिखना सीखें ....
हमारी प्रथाओं परम्पराओं को सीखें .... अध्ययन करें ....
फिर समीक्षा करें !!!! ....


#विट्ठलदासव्यास
जय श्री राम


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एक गाना है ,,,
आओ बच्चों तुम्हे दिखाएँ झांकी हिन्दुस्तान की ,,,
उसमे एक अंतरा आता है ,,,,,



"ये है अपना राजपुताना नाज़ इसे तलवारो पे
ये प्रताप का वतन पला है आजादी के नारो पे
कूद पड़ी थी यहां हज़ारो पद्मिनियां अंगारो पे
बोल रही है कण कण से कुर्बानी राजस्थान की "



अब इसमें कहानी ये है की अलाउद्दीन ख़िलजी ने जब आक्रमण किया तो रानी पद्मावती अपनी आबरू की रक्षा के लिए जिन्दा जौहर (एक प्रकार से अग्निकुंड)में समा गयी थी ,,,और अब भारतीय सिनेमा के निर्देशक संजय लीला भंसाली जी उसपे फ़िल्म बनने की शूटिंग के दौरान राजस्थान गए थे ,,,फ़िल्म में रानी पद्मावती का प्रेम दिखाया है ख़िलजी से ,,,उनसे जिनसे रक्षा क लिए वो बलिदान हुई ,,,अब इतिहास को तोफ मरोड़ कर पद्मावती को ये बनाओगे ,,,बाजीराव को अय्यास दिखाओगे ,,,,तो कही ना कही दिक्कत में आओगे ,,,अब कुटाई कर दी राजस्थानियो ने इसी बात पर ,,भंसाली जी की ,,,कैमरे भी तोड़ दिए ,,,,सारा काम शूटिंग स्पॉट पर ही हुआ ,,,��,,,तो सबको दुःख हो रहा है ,,,होना नहीं चाहिए ,,,जो हुआ सही हुआ ,,खुद नंगे हैं फिल्मिस्तान में सब ,,,,,देश के इतिहास ने जो चोला ओढ़ा है ,,,उसे जबरदस्ती क्यों हटा रहे हो ,,जैसा था वैसा दिखाओ ,,या दिखाओ ही मत ,,,गलत दिखाओगे तो गलत ही खाओगे ,,,तुम्हारे यहां इज्जत आबरू की कोई औकात ही नहीं है ,,,पर जिन्होंने इसी के लिए खुद को जिन्दा जला दिया ,,उन्हें तो बख्श दो ,,, गलत दिखाने वाले फिल्मकार और इतिहासकारो का समय समय पर इलाज़ हो ही जाए तो अच्छा है ,,


जय श्रीराम मित्रा नू_-_//\__




*‘अल्टरनेट व्यू’ पर थप्पड़ नहीं लगता साहब, ‘डबल स्टैंडर्ड’ पर लगता है !*
कहते हैं सिनेमा समाज का आईना होता है, ठीक वैसे ही जैसे साहित्य समाज का आइना होता है. फिर ये आइना अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की छूट कैसे दे देता है ?
"...यहां प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे,
कूद पड़ी थी यहां हज़ारों पद्मिनियां अंगारों पे.
बोल रही है कण कण से कुर्बानी राजस्थान की..."

फिल्म के लिए रिसर्च करते समय संजय लीला भंसाली ये नहीं पढ़ा या सुना था क्या? भाई पद्मिनी पे पिक्चर बना रहे थे तो मलिक मुहम्मद जायसी का पद्मावत भी पढ़ा ही होगा.
जब इतिहास के हर दस्तावेज़ में पद्मिनी को जगह ही इसीलिए मिली कि वो अलाउद्दीन खिलजी के आने के पहले हज़ारों औरतों के साथ आग में कूद गई, तो कौन से ‘अल्टरनेट व्यू’ से आप खिलजी और पद्मिनी को प्रेम कहानी के खांचे में ढाल रहे हैं? और अगर ‘अल्टरनेट व्यू’ के नाम पे कुछ भी जायज़ है तो फिर विरोध के ‘अल्टरनेट’ तरीके पर इतना हंगामा काहे के लिए है?
करनी सेना ने संजय लीला भंसाली के साथ सही नहीं किया, लेकिन करनी सेना जैसे संगठनों को ताकत कहां से आती है?
उसी बॉलीवुड से आती है, जो संजय लीला भंसाली को थप्पड़ पड़ने पे तो अभिव्यक्ति की आज़ादी चिल्लाने लगता है, लेकिन ए आर रहमान के खिलाफ़ फतवा आने के बाद मुंह ढंक कर सोया रहता है.
करनी सेना को ताकत उस कोर्ट से आती है जो जल्ली कट्टू को जानवरों पर अत्याचार मान कर बैन कर देता है, लेकिन बकरीद के खिलाफ़ याचिका को सुनने से ही इंकार कर देता है.
करनी सेना को ताकत उस सिस्टम से मिलती है जो एम एफ़ हुसैन को हिंदू देवी देवताओं की अश्लील तस्वीरें बनाने पर तो सुरक्षा मुहैया कराता है लेकिन चार्ली हेब्दो वाला कार्टून अपने पब्लीकेशन में छापने वाली औरत को दर दर धक्के खाने के लिए मजबूर कर देता है.
*गुंडागर्दी जायज़ नहीं है. लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अपनी ‘इंटेलेक्चुअल गुंडागर्दी’ भी तो बंद कीजिए !*




P_Jani is online now   Reply With Quote
Old 01-28-2018, 09:31 PM   #16 (permalink)
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A lot of history that dates back hundreds of years was not written down or documented and instead was passed down verbally through poems, bards and folk songs. This is especially true of the Rajputana, because Rajasthan was invaded continuously for centuries from outsiders and it was only after Shah Jahan came to rule India, that he made permanent peace with the Rajputs. Now every time, a fort was invaded in Rajasthan (and they almost, always lost every battle), whatever history they had documented invariably got destroyed. Hence, the history of Rajasthan is a mix of fiction and fact.

Take for example the fact that Padmavati was a princess from the Singhal Kingdom, the present day Sri Lanka. Now in those days, Hindu's would never cross water, it was considered very inauspicious. In fact, this mindset was prevalent well into the 20th century too. Sri Lanka is an Island and to reach the princess, Ratan Singh would have had to cross the Sea. No way, would an orthodox Hindu King every do that. Also, the logistical impossibility of travelling all the way from Rajasthan to Sri Lanka seems improbable in the 13th century. The Afghans, Mongols and the Turks were nomadic in nature and hence they could travel for months, but not the Rajputs, who never stepped out of Rajasthan.

It was only when Jayasi published his Padmaavat, that the mention of Queen Padmavati comes to light. A poet named Narayanchandra Suri had written a very similar story two hundred years before Jayasi which became the base for Padmaavat. Jayasi's patron was a Rajput King and hence he made all his characters Rajputs, probably in order to please him. Hence, if you look at it from Jayasi's point of view, Padmavati was a completely fictional character. He as much as declares in the poem that he has imagined all the characters for his poem.

Amir Kusro was a legendary historian who accompanied Khiji when he set out to attack Chittor and has documented the siege of Chittor and the capture of the Rana. He doesn't mention Padmavati's name anywhere and or do any other historians during that period. Kusro doesn't even name Ratan Singh as the ruler of Chittor, and just refers to him as Rai in his chronicles. There is no mention of Jauhar also anywhere, though Kusro does write about Khilji ordering his soldiers to massacre around 30,000 Hindu men when they conquered Chittor.

There are four type of ideal women described in Hindu scriptures and Padmini is supposed to be the best among them, and this is most probably why Jayasi names the heroine of his poem as Padmini or Padmavati. Uptill Jayasi's Padmaavat, there is no mention of the Queen.

So, I suppose what happened was that people started mixing up fact and fiction and as the story kept passing down generation after generation, the legend of Padmavati was born. Khiji and Ratan Singh are historical figures where as Padmini is not. But it all got mixed up, thanks to Jayasi.
Just copied:

Source : Padmaavat BO & Review Thread - ALL DISCUSSIONS HERE ONLY (Page 109) | 4950472 | Bollywood News, Bollywood Movies, Bollywood Chat Forum

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Talk of the Town,.....

Padamavat : Hot discussion going on here,... [ Flip all pages ]

Padmaavat BO & Review Thread - ALL DISCUSSIONS HERE ONLY (Page 109) |

4950472 | Bollywood News, Bollywood Movies, Bollywood Chat Forum

Padmaavat BO & Review Thread - ALL DISCUSSIONS HERE ONLY (Page 114) | 4950472 | Bollywood News, Bollywood Movies, Bollywood Chat Forum
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Padmavat :

Folks,
just watched this movie on-line, in an ok quality,……. And, sure will watch in Bluray DVD quality later, once more,…. !

Here are my findings and opinions,… ( many Spoilers Alert )

Movie is in-line with all SLB’s movie with perfect still and frame like a painting, every scene, …….and somehow imo, Bajirav mastani, Raam-leela and devdas I found above this movie,.. .. this movie’s ‘holding power’ remains a little less than those,..

IMO, Khilji is not shown that much wild / Mad or aadi-manav type, that I read and heard from many, ( He is, but not that much ) and yess,….. Khilji and Padmavati are never shown in any single frame so, no chance of face to face dialects, or rape / love / pulling Pallu,.... mujara/nachaniya giri / arguments of dialect baaji or any such,… ! No nothing,...

Ghoomer song is a little holding one,.. Dipika’s steps are ok,. Still not that good like Piggy, ash or madhuri in, BM and devdas,.......n' rest songs are junk, boring and of not that attractive sets either,… ! At certain stages, movie also gives you yawns ( drags in boredom zone ) ,…
IMO,.. just like BM, Piggy was needing, than aditi ravo,… Raza murad is just ok ( short role ),.. and Shahid’s acting is a joke, due to their childish body-look and immature body-structure and face,…,…..
Ranveer , has now already surpass, 3 khans.......... and aces with main-shoulder hero of such major budget movies,..

Perhaps, when padmavati goes to meet Khilji, at that time they may have engaged in argument-baazi, ( in earlier scenes - my guess ) but it seems,.. after so much hoopla,...... Naturally SLB, deleted those scenes and she escaped from Khilji’s adda, without even “ Mukhar-vandan “ , which was promised,…!

Sahhid kapoor, as always seems like a choco boy of teen age,.. and hence imo is not a proper justification here,.. perhaps,… “ Prem rattan dhan paayo " ' s Salman was needed here as Ratan singh,.

War scenes did not find that excellent like Bahubali, Troy, Excalibur, Mughle-aazam, hunger games, and other many such Killah-war movies,…

Johar scenes I found ok, and perhaps with more efforts could had shown all the way, on-fire agni-kund,… till jumped in the fire with chanting and burning Om-swaha,.. and till the ashes,.. but at the end, it seems like movie turns black screen,.. 10 minutes earlier,….. ( movie ends 5-10 minutes earlier than expectation......., and except last 25 minutes of real holding,… rest,.. lags and drags in boredom-zone, at couple of times ) Johar speech could had been made even 3 times more effective ( since it is the most major event of our history than end speeches of Big B in Mohabbatein, K3G, Baghbaan ,….
And Rajput’s “ Kesariya “ could had shown more effective, than what is shown,.. On Top of every Rajasthanii Killah, the slots are for pouring the Hot Oils in big vessels,.....over the enemy, dunno how come, SLB missed that, in fight-scenes !

IMO, Movie remains fairy, fictitious and filmy story on many and Major occasions ( just like movie BM ) and divorces from reality, naturally,……

As per the history, science and technicality,....... Padmavti character is also an imaginary ( Ratan singh and Khilji are real characters ) and created by a Poet from stories Vedas and Shastra,…( imo ) for the following reasons..
Monalisa's Smiley thread

Overall, a good movie and can be rated 3.50 / 5.0




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I have posted much more photos and funny material on this,.....

SLB's single eye-brow girl - Dipika,...

Monalisa's Smiley thread - Page 2537 - Snehasallapam - Malayalam Cinema Reviews, News and Updates ( Flip all pages )


SRK sir & his fans r commiting JAUHAR after #Padmaavat crossed 100cr in weekend only. For him 100cr is a dream #Khalibali

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Padmavat :



On the top of any such Rajasthani Killah, the Slots you see, was ( not for firing at that time, as were having no guns during taht time,.. ) n' also having a nick/gutter on the fort on other side of slots,..,...and they were meant to pour the hot n' boiling oil on enemies, who tried to climb it from the other side,....

I dunn'o why Bhansaali failed to show those thingies,...during fights,..

Also, in Rajasthaanis dessert areas, where a big trunk of tree were never available,.....
so, they were bringing a camel and camel.s were standing against the door parallel to it,....standing at big nails
and 2-3 Hugh elephants were used for pushing the camels to break the Killah's doors,
so camel/s would die,... but elephants never would get nails in their foreheads, n' getting mad,...and were used to breaking the gates of Killah, by pushing the camels,..


.....

Flip for some photo material here.....

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